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सरकार का फरमान किसके लिए?

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पूरे देश में कोरोना के बढ़ते आंकड़े अब लोगों की बेचैनी बढ़ा रहे हैं। इसका नया वैरिएंट ओमिक्रॉन लगातार लोगों को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। देखते देखते पूरे देश में ओमिक्रॉन के कुल केस 350 पार हो गए हैं।
ओमिक्रोन का खतरा पूरे देश में बढ़ता जा रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में रात 11 बजे से सुबह पांच बजे तक रात्रिकालीन कर्फ्यू लागू होगा। इसके साथ ही अब शादी-विवाह आदि सार्वजनिक आयोजनों में कोविड प्रोटोकॉल का साथ ज्यादा से ज्यादा 200 लोगों के भाग लेने की अनुमति होगी। सरकार का उचित कदम है लेकिन इस पर और भी गौर करने की जरूरत है।
याद कीजिए पिछले साल कोरोना ने धीमे-धीमे अपने पांव फैलाने शुरू किए थे तो सरकार कई प्रदेशों में चुनाव कराने में व्यस्त थी जिसका नतीजा पूरे देशवासियों ने देखा। गंगा के किनारे का दृश्य लोगों के जहन में अभी भी महसूस है।
एक बार फिर जबानी जंग लड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है कोरोना के बढ़ते नये वैरीएंट को रोकने के लिए जुबानी जंग से काम नहीं चलेगा इससे लोगों को बेवकूफ तो बनाया जा सकता है लेकिन लोगों की जान नहीं बचाई जा सकती।
पहले जो सबसे अहम चीज यह है रात को 11:00 बजे के बाद सुबह 5:00 बजे तक कौन सी ऐसी एक्टिविटी होती है जिससे कोरोना बढ़ने का अंदेशा है। रात को सड़कों पर सन्नाटा रहता है कहीं कोई भीड़ नहीं होती बाजार बंद होते हैं दुकानें बंद होती हैं लोग घरों में होते हैं ऐसे में रात्रि कर्फ्यू का क्या औचित्य है।
अब सवाल दिन का जहां दिन में दुकानें खुली होती हैं सड़कों पर भीड़ होती है दुकानों पर लोग जमा रहते हैं मैदानों में चुनावी रैलियों में हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहते हैं स्कूल में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं जमा रहते हैं। बसों में ट्रेनों में भीड़ होती है इनका क्या किया जाएगा?
वैसे भी पिछले साल अप्रैल 2020 से अभी तक देश के नागरिकों विशेष तौर से मध्यम वर्ग की कमर को पूरी तरह तोड़ा जा चुका है। लोगों की नौकरियां चली गई लोगों के व्यवसाय बंद हो गए न जाने कितने कारोबार ठप्प हो गए न जाने कितनी कोचिंग और छोटे स्कूल बंद हो गए उनका क्या हुआ। इन बेरोजगार लोगों का कोई पूछने वाला नहीं है।
बेहतर होगा कि सरकार अभी से ठोस कदम उठाए चुनावी रैलियों पर पाबंदियां लगाएं बाजार की भीड़ कम करने का प्रयास किया जाए स्कूलों के लिए भी गाइडलाइन लागू की जाए।
कोविड प्रभावित लोगों के लिए अलग से व्यवस्था की जाए क्योंकि अगर अस्पतालों में सामान्य चिकित्सा गतिविधियों को रोक दिया जाएगा जैसा कि पिछले साल हुआ था तो बहुत लोगों की जान खतरे में आ जाएगी।
वैक्सीन तो लोग लगवा रहे हैं लेकिन सरकार और चिकित्सा विशेषज्ञ भी यह बात मान रहे हैं कि पहली और दूसरी डोज़ लगवाने के बाद भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है और बूस्टर डोज़ की बात होने लगी है इसका मतलब तस्वीर बिल्कुल भी स्पष्ट नहीं है कि कौन सुरक्षित है और कौन सुरक्षित नहीं है।
हां मगर यह स्पष्ट है कि चुनाव की रैलियां सुरक्षित है।
जय हिन्द

सैय्यद एम अली तक़वी
चीफ़ एडिटर- यूरिट न्यूज़ अलर्ट-नेटवर्क 14

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