डॉक्टर अली मुहम्मद नक़वी साहब का मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया जाना एक अच्छा क़दम है। हमारी डॉक्टर साहब से पहली मुलाक़ात, उनके पिता सैयद अली नक़ी नक़वी, जो एक बड़े स्कालर थे, की मृत्यु के समय हुई थी। उसके बाद उनसे अनेक बार भेंट हुई और विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई- इसमें इस्लाम, राष्ट्रवाद, इक़बाल से लेकर अनेक सामयिक विषय शामिल रहते थे।
सैयद अली नक़ी साहब जिन्हें नक़्क़न साहब कहा जाता था एक पाये के आलिम थे। जब कर्बला की घटना के इस्लामी कैलंडर के अनुसार 1300 वर्ष (1942 में) होने को थे तो तमाम उलेमा ने इमाम हुसैन पर एक किताब लिखे जाने का प्रस्ताव रखा जिसके मसवदे की ज़िम्मेदारी तत्समय सबसे यंग स्कालर नककन साहब के सुपुर्द की गयी। उन्होंने उसे तैयार कर के विद्वानों के बीच पेश कर दिया, लेकिन एक वर्ग ने इसमें वर्णित कुछ घटनाओं को आस्था के विरुद्ध बता कर घोर विरोध शुरू कर दिया जिससे समाज दो हिस्सों में बंट गया था। आज भी एक वर्ग ऐसा है जो इस नफ़रत को पाले हुए है।
नककन साहब ने अपने पुत्र डॉक्टर अली मुहम्मद को पब्लिक डोमेन से दूर रखा था। अपने पिता की मृत्यु के बाद अनेक युवाओं के आग्रह पर उन्होंने सक्रिय होना शुरू किया और धीरे-धीर वह नौजवानों में लोकप्रिय होने लगे।
इसकी मुख्य वजह डॉक्टर साहब की अप्रोच का काफ़ी हद तक तार्किक होना और विनम्र स्वभाव को होना था। लेकिन, उनकी लोकप्रियता क देखते एक साज़िश के तहत उन्हें लखनऊ से दूर कर दिया गया और उनको अलीगढ़ में शिफ़्ट करा दिया गया।
ज़ाती तौर पर हम डॉक्टर साहब से काफ़ी प्रभावित रहे हैं, कुछ चीज़ों को लेकर हमारी समझ अलग थी लेकिन हमारी अप्रोच की वह तारीफ़ करते थे। वह कहते थे कि नौजवानों को किसी भी विषय पर विमर्श से पहले उसकी बुनयादी किताबों को पढ़ना चाहिए वरना हम आगे नहीं बढ़ सकते।
नक़्क़न साहब के तीजे की मजलिस उनके एक शिष्य, जो आजकल आयतउल्लाह बने हैं, ने पढ़ी थी और इसी मौक़े पर उनके सर पर पगड़ी रखी गयी थी। यह भी एक त्रासदी है कि आज वह मौसूफ़ मजलिस पढ़ने (प्रवचन) के लाखों वसूल करते हैं।
डॉक्टर अली मुहम्मद साहब की एक इल्मी विरासत है, उनका ताल्लुक़ हिंदुस्तान के पहले मुजतहिद मौलाना दिलदार अली ग़ुफ़रानमाब (1753-1820) से है, और सही मायनों में वह ही उनके उत्तराधिकारी हैं। उनकी मुस्लिम पर्सनल बोर्ड में नियुक्ति एक सकारात्मक क़दम है जो उदारवादी दृष्टिकोण को और सशक्त करेगी।