मो0-9670199992
*शहर कांग्रेस कमेटी लखनऊ*
पार्क रोड, विधायक निवास, लखनऊ
दिनांक-12.04.2021
राजधानी लखनऊ में कोविड की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। इस वक्त कोविड के मरीजों की संख्या पांच हजार के आसपास पहुंच चुकी है। इससे निपटने में प्रशासनिक अमला पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। जिन अफसरों पर इस बीमारी से निपटने की जिम्मेदारी थी वह समय रहते खतरे को भांप नहीं सके। जिसका नतीजा यह है कि अब यहाॅं की जनता भगवान भरोसे है। स्थितियां यह हैं कि बुखार और कोविड लक्षण वाले मरीजों की सैंपलिंग में दो दिन लग रहे हैं औदर उसके दो दिन बाद रिपोर्ट मिल रही है। इसके बाद किसी अस्पताल में बेड नहीं हैं। लिहाजा गंभीर मरीज सीएमओ और अस्पतालों के चक्कर काटते हुए मर रहा है। पिछले साल की तुलना में मरीजों की संख्या चार गुना हो गई लेकिन प्रशासन ने सुविधाएं और इंतजाम घटाकर आधे कर दिए हैं। ऐसे में प्रतीत हो रहा है कि यह संकट प्रशासन की तरफ से बढ़ाया गया है। महोदय ऐसे में शहर की जनता के कुछ सवाल हैं जिनका जवाब तलाशकर काम किया जाए तो शायद स्थितियों में कुछ सुधार हो सके:-
*1. पिछले वर्ष कोविड संक्रमण के दरम्यान जब कोविड के मरीज महज 1100 और 1500 के करीब थे तब शहर में कोविड मरीजों के लिए 31 अस्पतालों में भर्ती के इंतजाम थे। इस साल संक्रमितों का आंकड़ा पांच हजार के करीब है तो अस्पतालों की संख्या घटाकर 20 क्यों रखी गई है?*
*2. पिछले साल केजीएमयू में कोविड मरीजों के लिए करीब 400 बेड थे, इस साल चार गुना मरीज होने पर बेड घटाकर 300 क्यों किए गए? बेड में ऐसी कटौती कई अन्य अस्पतालों में भी की गई। ऐसा क्यों?*
*3. लोकबंधु और रामसागर मिश्रा अस्पताल में पिछले साल वेंटीलेटर खरीदे गए थे लेकिन इस साल उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है जबकि मरीज वेंटीलेटर के इंतजार में सांसें तोड़ रहे हैं ऐसा क्यों? लोकबंधु अस्पताल में खरीदे गए 30 वेंटीलेटरों में महज 10 काम कर रहे हैं जबकि रामसागर मिश्रा में भेजे गए सभी 10 वेंटीलेटर खाली पडे हैं। मुझे आशंका है कि प्रदेश के बाकी जिलों में भी ऐसा ही हो रहा होगा ।*
*4. क्या बिना मैनपावर का इंतजाम किए अफसरों ने महज कमिशनखोरी के लिए करोड़ों की खरीद की थी? अगर नहीं तो यह मशीनें क्यों नहीं चल रही हैं?*
*5. पिछली बार महज 1100 से 1200 संक्रमितों की पहचान होने पर चरक, मैकवेल, अपोलो के साथ आनंदी वाटर पार्क और हज हाउस में एक हजार आइसोलेशन बेड का इंतजाम किया गया था लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया।*
*6. पिछले साल तमाम निजी पैथोलॉजी मरीजों के फोन करने पर घर जाकर सैंपल ले रही थीं लेकिन इस बार पैथोलॉजी के प्रबंधकों को ऐसा न करने की हिदायत दी गई है। घर से सैंपलिंग बंद हैं, ऐसा क्यों किया गया है? जबकि संक्रमण तेजी से फैल रहा है और ज्यादा से ज्यादा संक्रमितों की जल्द से जल्द पहचान जरूरी है ।*
आशा है आप उपरोक्त तथ्यों से सहमत होकर इस सम्बन्ध में तत्काल आवश्यक निर्णय लेते हुए राजधानी की जनता को राहत पहुॅंचानें की कृपा करेंगे।
सम्मान सहित,