बीजिंग/नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2026: होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पहली बार चीन ने ईरान के खिलाफ स्पष्ट और सख्त संदेश दिया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और इसे हर हाल में खुला रहना चाहिए। भारतीय जहाजों पर ईरानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी की पृष्ठभूमि में चीन का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है।
चीन का बदला हुआ रुख
चीन ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर उसका रुख पहले भी स्पष्ट रहा है और वह आज भी उसी स्थिति पर कायम है। बीजिंग ने दोहराया कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए किसी भी देश को इसे बाधित करने का अधिकार नहीं है।
चीनी नेतृत्व का यह बयान ईरान के लिए कूटनीतिक दबाव की तरह देखा जा रहा है। अब तक कई मसलों पर चीन ईरान के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाता रहा है, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही और सुरक्षा को लेकर उसने सीधे शब्दों में आपत्ति जताई है।
भारतीय जहाजों पर हमले के बाद बढ़ी चिंता
भारतीय जहाजों पर ईरानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी की खबरों ने पहले ही क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। समुद्री व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की हिंसक कार्रवाई का असर केवल एक देश पर नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।
भारत के लिए यह मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में वहां बढ़ती अस्थिरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक चिंता को बढ़ा रही है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक संकेत
चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार अपील कर रहा है कि समुद्री मार्गों को युद्ध और टकराव से दूर रखा जाए। बीजिंग का कहना है कि स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए सभी पक्षों को संयम दिखाना चाहिए।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन का यह बयान सिर्फ कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार हितों की रक्षा का संकेत भी है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अगर तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों, नौवहन सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा असर पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर चीन का सख्त रुख, जिनपिंग बोले—अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, इसे खुला रहना चाहिए





