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बाल दिवस: बच्चों की मुस्कान में ही बसता है भारत का भविष्य, शाबू ज़ैदी

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हर वर्ष 14 नवंबर को पूरा देश बाल दिवस मनाता है। यह दिन हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री, स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। नेहरू जी बच्चों से गहरा प्रेम करते थे, और बच्चे भी उन्हें प्यार से ‘चाचा नेहरू’ कहकर पुकारते थे। उनका मानना था कि देश का वास्तविक भविष्य बच्चों के हाथों में है और जिस प्रकार हम उन्हें शिक्षा, संस्कार और अवसर देंगे, वैसा ही कल का भारत बनेगा।

बच्चे समाज की सबसे पवित्र कड़ी हैं। उनकी मुस्कान किसी भी अंधकार को रौशन कर सकती है। वे सादगी, भोलापन और सच्चाई का प्रतीक हैं। किसी शायर की यह पंक्तियाँ मन को गहराई से छूती हैं—

“घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें,

किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए।’

इन शब्दों में मानवता का सबसे सुंदर संदेश छिपा है— ईश्वर की आराधना सबसे पहले इंसान की सेवा में है, और इंसानों में भी सबसे मासूम वही हैं जिन्हें बचपन कहते हैं।

बाल दिवस हमें याद दिलाता है कि सिर्फ अपने बच्चों का नहीं, बल्कि हर उस बच्चे का ख्याल रखना भी हमारा धर्म है जो किसी कारण मुस्कुराना भूल गया है। किसी अनाथ या जरूरतमंद बच्चे को पढ़ाई का अवसर देना, उसके साथ समय बिताना, या बस उसे हंसाना— यही सच्चा उपहार है जो हम इस दिन दे सकते हैं।

बच्चे ही भारत की आशा और ऊर्जा हैं। इनकी उजली आँखों में कल का भारत झलकता है। इसलिए हर बच्चे के भीतर छिपे सपनों को उड़ान देना, उन्हें सुरक्षित और सशक्त बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। जब हर बच्चा मुस्कुराएगा, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र भी मुस्कुराएगा।

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