छतरपुर में गरबा प्रोग्राम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा है कि गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री नहीं होनी चाहिए। उन्होंने गरबा पंडालों के गेट पर गौमूत्र रखने की सलाह दी है, जिससे गैर-हिंदुओं को प्रवेश से रोका जा सके। शास्त्री का कहना है कि जैसे हिंदू समुदाय हज यात्रा में भाग नहीं लेता, वैसे ही गैर-हिंदुओं को गरबा पंडालों में नहीं आना चाहिए ¹ ².
*गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक के पीछे के कारण:*
– *सनातन परंपरा*: गरबा हमारी सनातन परंपरा का पावन पर्व है, जिसमें मां दुर्गा की स्तुति की जाती है। इसलिए, इसका महत्व और पवित्रता बनाए रखने के लिए गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाई जा रही है।
– *लव जिहाद*: हिंदू संगठनों का मानना है कि गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री से लव जिहाद जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इसलिए, वे गरबा संचालकों से गैर-हिंदुओं को प्रवेश न देने की अपील कर रहे हैं।
– *सुरक्षा और सम्मान*: कुछ गरबा आयोजकों का कहना है कि वे सुरक्षा और सम्मान के लिए गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगा रहे हैं। उनका मानना है कि इससे महिला और बालिकाओं के हितों की रक्षा होगी ³ ² ⁴.
*गरबा पंडालों में प्रवेश के लिए नए नियम:*
– *आधार कार्ड की जांच*: प्रवेश करने वालों की पहचान की पुष्टि के लिए आधार कार्ड की जांच की जा रही है।
– *तिलक और कलावा*: गरबा पंडाल में प्रवेश करने वालों को माथे पर तिलक और हाथों में कलावा पहनना अनिवार्य किया गया है।
– *गंगाजल और गौमूत्र का आचमन*: कुछ पंडालों में प्रवेश करने से पहले गंगाजल और गौमूत्र का आचमन करना अनिवार्य किया गया है ².





