सीनियर एडवोकेट मोहम्मद हुसैन रिज़वी के संवैधानिक तर्क पड़े भारी, वक्फ न्यायाधिकरण ने सीईओ जीशान हैदर रिज़वी समेत दो अधिकारियों को भेजा सिविल कारावास
लखनऊ। उत्तर प्रदेश वक्फ न्यायाधिकरण, लखनऊ ने इमामबाड़ा आगा बाकर प्रकरण में एक महत्वपूर्ण और चर्चित फैसला सुनाते हुए शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जीशान हैदर रिज़वी तथा अधिकारी अफसर मिर्ज़ा को न्यायाधिकरण के आदेश की अवहेलना का दोषी मानते हुए एक माह के सिविल कारावास की सज़ा सुनाई है। सीनियर एडवोकेट मोहम्मद हुसैन रिज़वी द्वारा प्रस्तुत संवैधानिक और विधिक तर्कों को स्वीकार करते हुए न्यायाधिकरण ने माना कि अंतरिम स्थगन आदेश के बावजूद संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई की गई, जो न्यायिक आदेश के उल्लंघन की श्रेणी में आती है।
यह मामला राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक इमामबाड़ा आगा बाकर के प्रबंधन विवाद से जुड़ा है। न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को न्यायिक आदेशों की मनमानी व्याख्या करने अथवा उन्हें दरकिनार करने का अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या प्रशासनिक आपत्ति थी तो उसके लिए विधिक प्रक्रिया उपलब्ध थी, लेकिन स्थगित आदेश को किसी भी रूप में प्रभावी बनाने का प्रयास न्यायिक आदेश की अवहेलना माना जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार वक्फ मामलों में इस प्रकार का आदेश अत्यंत दुर्लभ है और इसे वक्फ प्रशासन में जवाबदेही, पारदर्शिता तथा न्यायिक आदेशों की सर्वोच्चता स्थापित करने वाले महत्वपूर्ण फैसलों में गिना जा रहा है।यह हेडिंग खबर को अधिक प्रभावशाली बनाती है और सीनियर एडवोकेट मोहम्मद हुसैन रिज़वी की भूमिका को भी प्रमुखता से सामने लाती है।
