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देवबंद का अपमान वही कर सकते हैं जिनके पूर्वज अंग्रेजों के मुखबिर रहे हो: शाहनवाज हुसैन

लखनऊ 18 अगस्त 2021। अफगानिस्तान पर तालीबान के क़ब्ज़े से जोड़ते हुए योगी सरकार द्वारा सहारनपुर के देवबन्द में एटीएस ट्रेनिंग सेंटर खोलने के निर्णय को अल्पसंख्यक कांग्रेस चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने हर मोर्चे पर विफल सरकार का ध्यान हटाने वाला नाटक करार दिया है।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि देवबन्द की छवि बिगाड़ने की यह कोशिश स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े सभी संस्थानों और लोगों का अपमान है। क्योंकि देवबन्द मदरसे से निकले हज़ारों उलेमाओं ने कांग्रेस के साथ मिलकर अंग्रेज़ों के खिलाफ़ संघर्ष किया था और शहादतें दी थीं। उन्होंने कहा कि देवबन्द की छवि बिगाड़ने का काम वही लोग कर सकते हैं जिनके पूर्वज अंग्रेज़ों से माफी मांगते थे और कांग्रेस नेताओं की जासूसी करते थे।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि 2007 में मालेगांव, समझौता एक्स्प्रेस, मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ़ दरगाह पर हुए आतंकी हमलों और पूर्व उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी जी की हत्या की साज़िश रचने में पकड़े गए संघी तत्वों ने एटीएस के पूछताछ में बहुत सारे लोगों के नाम लिए थे जो आज दुर्भाग्य से प्रदेश चला रहे हैं। इसके रिपोर्टस एटीएस की चार्जशीट के हवाले से तब के अखबारों में लगातार प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी आतंकी घटनाओं में अपनी संदिग्ध भूमिका के कारण चर्चा में आई हिमानी सावरकर जो गांधी जी के हत्यारे गोडसे की भतीजी और अंग्रेज़ों से माफ़ी मांग कर छूटने वाले सावरकर की पुत्र वधु थी भी लगातार योगी आदित्यनाथ के संपर्क में थी और उनके कार्यक्रमों में आती थीं। यहां तक कि तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह जो अब मोदी सरकार में मंत्री हैं खुद इन मामलों पर मीडिया में बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि योगी जी को हिमानी सावरकर से अपने संबंधों का खुलासा करना चाहिए।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि यह दुखद है कि जो लोग ख़ुद देश विरोधी गतिविधियों के कारण एटीएस की जांच के दायरे में रहे हों वो आज अंग्रेज़ों से लड़ने वाले देश भक्त संस्थानों पर एटीएस का पहरा लगाने की बात कर रहे हैं।

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