वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण अदालत की अवमानना अधिनियम के तहत सजा के तौर छह महीने तक की कैद या दो हजार रुपये का जुर्माना अथवा दोनों सजा हो सकती थी, लेकिन उनकर केवल एक रुपये का जुर्माना लगाया गया है. जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में उनको तीन साल तक वकालत करने से रोका जा सकता है या फिर उनको तीन माह के लिए जेल भेजा जा सकता है