गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में एक महत्वपूर्ण बिल पेश किया है, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोपों में कार्रवाई के प्रावधान हैं। इस बिल के अनुसार:
– *30 दिनों की हिरासत*: यदि कोई मंत्री या मुख्यमंत्री 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा या उन्हें हटा दिया जाएगा।
– *गंभीर आपराधिक आरोप*: यह बिल उन मामलों में लागू होगा जहां आरोप 5 साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराध से संबंधित हैं।
– *पद से हटाने की प्रक्रिया*: बिल में यह प्रावधान है कि यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री समय पर इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध किया है और इसे राजनीतिक प्रतिशोध का औजार बताया है। उनका तर्क है कि यह बिल विपक्षी दलों के नेताओं को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह बिल विपक्षी मुख्यमंत्रियों को अस्थिर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का एक तरीका है ¹.





