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मौलाना अरशद मदनी का अखिल भारतीय मदरसा सुरक्षा सम्मेलन में बयान: “मदरसों को बंद करने की मुहिम मुसलमानों के संवैधानिक और धार्मिक आजादी पर गंभीर हमला”

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आजमगढ़ 2 जून 2025 को जामिआ शरईया फैजुल उलूम, शेरवां ईदगाह, सरायमीर में आयोजित अखिल भारतीय मदरसा सुरक्षा सम्मेलन में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सय्यद अरशद मदनी ने madrasas की स्थिति और उनके खिलाफ हो रही कार्रवाइयों पर विस्तृत बयान दिया।
उनका पूरा बयान निम्नलिखित है:
“मदरसे हमारी पहचान हैं, इन्हें मिटाने नहीं देंगे। देश में बढ़ती सांप्रदायिकता, अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभावपूर्ण नीतियों और खासतौर पर मदरसों को निशाना बनाए जाने के खिलाफ आज यह सम्मेलन आयोजित किया गया है। मदरसों को बंद करने की मुहिम मुसलमानों के संवैधानिक और धार्मिक आजादी पर एक गंभीर हमला है। मदरसे मुसलमानों की जीवन-रेखा हैं, और अब हमारी इसी जीवन-रेखा को काट देने की साजिश हो रही है।
मदरसों पर सबसे पहले असम सरकार ने हाथ डाला था, फिर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने भी ऐसा ही किया। अब हरियाणा सरकार ने भी पानीपत और अन्य जगहों पर नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। सरकार द्वारा तरह-तरह के नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे मदरसा संचालकों को भयभीत किया जा रहा है। उत्तराखंड में तो मकतब और मदरसों के कार्यों में सरकारी अधिकारी असंवैधानिक हस्तक्षेप कर रहे हैं, और कई मदरसों को जबरदस्ती बंद करवाया गया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी उल्लंघन है।
मदरसों ने देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी कुर्बानियों को भुलाया नहीं जा सकता। सरकार को उनके पीछे पड़ने की जरूरत नहीं है। मदरसों का सर्वेक्षण करना सरकार के अधिकार में है, लेकिन इसे मुसलमानों को लक्षित करने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हमारी मांग है कि सरकार मदरसों के साथ भेदभाव बंद करे और संविधान द्वारा दी गई धार्मिक एवं शैक्षणिक स्वतंत्रता का सम्मान करे।
मदरसों को सरकारी फंड नहीं चाहिए। हम कल भी इसके खिलाफ थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे। जिस तरह मस्जिदों को फंड नहीं दिया जाता, उसी तरह मदरसों को भी मत दीजिए। मदरसे इस्लाम के मजबूत किले हैं, और इनकी भूमिका समाज में बेहद अहम है। इन्हें सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।”
मौलाना अरशद मदनी ने सम्मेलन में उपस्थित उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों से एकजुट होकर madrasas की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस मुद्दे पर कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी।

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