मुसलमान का रहबर बनने और उसको हटाने के लिए हमेशा खून बहा है,
ऐसे ही रहबर बनकर देश की आजादी के बाद एक अलग देश बनाने की गलती कर बैठे थे,
यह बात 16 आने सच है कि मुसलमानो को सबसे ज़्यादा नुकसान देश की आजादी के बाद से। अब तक सभी रहबारों से हुआ है,
हां फायदा उनके परिवार व खानदान के सदस्यों को बहुत हुआ है
उनकी आर्थिक स्थिति में वो सुधार हुआ है कि पुश्ते बैठकर खाएंगे,
आज फिर हमारे देश में मुसलमान के रहनुमाई कौन करेगा और कौन रहबर बनेगा इसकी लड़ाई जोरों पर चल रही है ,
हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मौलाना सज्जाद नोमानी ने फतवा दिया की मुसलमान अपना वोट इंडिया गठबंधन को दे ,
जिसको वोट जिहाद नाम दिया गया, और जमकर राजनीति हुई
लेकिन मुसलमान ने उनकी नो-मानी और अपना हित समझते हुए अपनी अक़्ल से वोट दिया,
जिसकी वजह से AIMIM को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मे केवल मुसलमान की बात करके भी 1 विधायक पर ही संतुष्ट होना पड़ा ,
इसी का दर्द/मलाल बयां करते हुए AIMIM प्रमुख ओवैसी ने 1 दिसंबर को सभा को संबोधित करते अपनी इच्छा अनुसार विधायकों की संखिया न प्राप्त होने का ठीकरा मौलाना मो-मानी और उनके फतवे पर फोर्ड दिया, और चीख चीख कर कहां की मौलाना नोमानी मेरे छोटे से घर में आए थे,
मैं उनके घर नहीं गया था, ओवैसी ने अपनी स्टाइल में आंखे पुटपुटाते हुए, मौलाना को हिदायत दी राजनीति से दूर रहना चाहिए और उनको इस्लाम के प्रचार पर ध्यान देना चाहिये, इसी संबंध में क़ोम के वो बेसहारा लोगों का ओवैसी साहब और मौलाना नोमानी और इनकंप्लीट रहबर और ढोंगी रहबरो से आज भारत का मुसलमान धोखे खाते-खाते काफी समझदार हो गया है,वो अपना अच्छा बुरा जानता है और कह रहा है हमको ऐसा रहबर नहीं चाहिए है,
जो घर से सांसद या घर से मस्जिद तक ही सीमित हो, हमको अपना रहबर ऐसा चाहिये,
चाहे वो किसी भी धर्म का हो उसमें सेवा भाव हो,पद और पैसे का लोभी न हो,
वो ई रिक्शा , पंचर,प्लंबर,पेंटर,कारपेंटर आरी दरदोज़ी टेलर मजदूरी मे कड़ी मेहनत करके खुद व अपने परिवार का आधा पेट भर पता है और किस तंगी में अपनी जिंदगी गुजारता हैं जिसका उसको एहसास हो और क़ोम की रोटी-रोजी शिक्षा ,सुरक्षा के
साथ ही साथ देश की एकता अखंडता को क़ायम करने की कोशिश कर रहा हूं और
सच्चर कमेटी को लागू करने के लिए अपनी आवाज उठा रहा हो,
गुस्ताक़ि माफ़👏


