ट्रंप की ‘भारत नीति’ पर उठे सवाल, लेकिन जोधपुर में गरजे F-35; मोदी की कूटनीति से रिश्तों में सहयोग की नई तस्वीर
नई दिल्ली | 27 सितंबर 2026 | शाबू ज़ैदी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार और रणनीतिक मुद्दों को लेकर जिस तरह तनाव देखने को मिला, उसने दोनों देशों के रिश्तों की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वर्ष 2025 में ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था को सोशल मीडिया पोस्ट में “डेड इकोनॉमी” तक कहा था। अमेरिकी टैरिफ और रूस से भारत के ऊर्जा संबंधों को लेकर दबाव ने भी दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़ाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति की इस नीति की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना हुई। कार्नेगी एंडोमेंट के विश्लेषण में कहा गया कि पिछले दो दशकों में भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयासों पर ट्रंप की नीतियों से गंभीर दबाव पड़ा। कुछ विश्लेषकों ने इसे करीब 25 वर्षों में रिश्तों को हुए सबसे बड़े झटकों में से एक बताया।
लेकिन मौजूदा तस्वीर का दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है। जोधपुर में 26 सितंबर से शुरू हुए ‘तरंग शक्ति 2026’ बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास में अमेरिका का F-35 स्टील्थ फाइटर पहली बार भारतीय धरती पर शामिल हो रहा है। यह भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग की निरंतरता को रेखांकित करता है। अभ्यास में भारत समेत कई देशों की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं।
भारत-अमेरिका संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक और रणनीतिक सहयोग लगातार जारी है। 2026 में भी दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण खनिजों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सहयोग बढ़ाने के कदम उठाए हैं।
ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति के सामने चुनौती यह रही है कि अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखते हुए भारत अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता न करे। भारत ने अमेरिका के साथ संवाद के रास्ते खुले रखे हैं, लेकिन रूस से ऊर्जा और रक्षा संबंधों सहित अपने राष्ट्रीय हितों पर भी अपना रुख कायम रखा है।
F-35 की जोधपुर में मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तरफ ट्रंप प्रशासन की व्यापारिक और राजनीतिक बयानबाजी से रिश्तों में तनाव दिखाई दिया, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान भारत के साथ सैन्य सहयोग जारी रखे हुए है। यही विरोधाभास बताता है कि भारत-अमेरिका संबंध केवल किसी एक नेता के व्यक्तिगत बयानों से तय नहीं होते, बल्कि इनके पीछे रक्षा, अर्थव्यवस्था, तकनीक, हिंद-प्रशांत और वैश्विक रणनीति जैसे व्यापक हित भी जुड़े हैं।
भारत के लिए यह स्थिति एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर भी है। अमेरिका के साथ साझेदारी बनाए रखते हुए भारत फ्रांस, रूस, जापान, यूरोप और अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को भी मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञ इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और जोखिम कम करने की नीति के संदर्भ में देखते हैं।
ट्रंप की कठोर बयानबाजी ने भले ही भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव पैदा किया हो, लेकिन जोधपुर के आसमान में F-35 की मौजूदगी यह संकेत देती है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग की बुनियाद अभी भी कायम है। भारत अपनी कूटनीति के जरिए दबाव के बीच भी राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए अमेरिका के साथ संवाद और सहयोग का रास्ता खुला रखे हुए है।
