कोविड 19 हेतु आईसीयू प्रबंधन पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

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उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में डा0 सूर्यकांत प्रोफेसर
एवं विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, केजीएमयू में अतिथि वक्ता के रूप में आमंत्रित
किया गया। यह कार्यशाला उ0प्र0 के 75 जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, एनेस्थेटिस्ट,
फिजिशियन, चेस्ट फिजिशियन, स्टाफ नर्स, टेकनीशियनों के प्रशिक्षण के लिए आयोजित की गर्इ थी। डा0 मिथलेश चतुर्वेदी (डीजी हेल्थ) और डा0 राजेंद्र कपूर (संचारी रोग के संयुक्त निदेशक, यू.पी.) ने बताया कि 75 जिलों के 304 केंद्रो ने प्रशिक्षण कार्यशाला में भाग लिया गया। प्रशिक्षण को वेबिनार के माध्यम से एक ऑनलाइन मंच पर किया गया था। डा0 राजेंद्र कपूर ने बताया कि डा0 सूर्यकांत के ज्ञानवर्धक और विचारशील व्याख्यान ने गहन चिकित्सा इकाई ;
गंभीर कोविड 19 रोगी के प्रबंधन पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। इस मौके पर डा0 डी.
एस. नेगी (महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय उ0प्र0) ने भी समस्त लोगों को नान इनवेसिव वेटिलेशन पर प्रशिक्षण दिया।
कोविड 19 की महामारी पूरे भारत और हमारे राज्य में गंभीर रुग्णता और मृत्यु दर का कारण
बना है। वर्तमान में संक्रमण दर एक खतरनाक दर में बढ़ रही है और मृत्यु दर और गंभीर हो
गयी है। वर्तमान परिदृश्य के मद्दे नजर उचित रोगी प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता के
समुचित प्रशिक्षण की विशेष रूप से गंभीर रूप से बीमार रोगियों में एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन और इंडियन चेस्ट सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष डा0 सूर्याकांत ने बताया कि किसी को कोरोना संक्रमण के बारे में घबराहट नहीं होनी चाहिए क्यूंकि लगभग 50 प्रतिशत संक्रमित रोगी लक्षण रहित होते हैं। मध्यम मामलों में 81 प्रतिशत रोगियों में हल्के लक्षण और 14 प्रतिशत मध्यम लक्षण और 5 प्रतिशत गंभीर लक्षण वाले होते हैं जिनको आईसीयू और यांत्रिक वेंटिलेशन की आवश्यकता हो सकती है। आईसीयू प्रबंधन आरम्भ करने के लिए रोगी को वर्गीकृत करने की आवश्यकता है। डा0 सूर्यकांत ने बताया कि एक मरीज की इम्यूनिटी, संक्रमण की गंभीरता को तय करती है। बहुत अच्छी प्रतिरक्षा वाले रोगी लक्षण रहित रहते हैं, कम इम्यूनिटी वाले रोगी में हल्के से मध्यम लक्षण होंगे और खराब इम्यूनिटी वाले रोगी को गंभीर संक्रमण होगा और आईसीयू में भर्ती की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने आईसीयू प्रवेश के मानदंड में ऑक्सीजन की कमी 95 प्रतिशत से कम होना, बेहोशी, निम्न रक्तचाप आदि को शामिल किया। डा0 सूर्यकांत, अध्यक्ष, इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा
और एप्लाइड इम्यूनोलॉजी, ने सामान्य आईसीयू प्रबंधन के बारे में बताया जिसमें ऑक्सीजन,
स्टेरॉयड, आईवी फ्लूड, बीपी को सामान्य बनाए रखने के लिए दवाएं, डायबिटीज जैसी अन्य
बीमारियों का उपचार व विशेषज्ञ की राय के अनुसार रेमेडसविर और टोसीलिजुमाब जैसी दवाओं
द्वारा विशिष्ट उपचार शामिल है। आईसीयू में सुधार आने के पश्चात रोगी को वार्ड में भेजा जा
सकता है। यह तब किया जा सकता है जबकि मरीज का बीपी समान्य हो, रोगी सचेत हो, खून
में आक्सीजन की मात्रा 95 प्रतिशत से ज्यादा हो।

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