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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान: धर्म और कर्तव्य पर जोर*

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए धर्म और कर्तव्य पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अहिंसा का सिद्धांत हिंदू धर्म में निहित है, लेकिन हमलावरों से परास्त नहीं होना भी कर्तव्य का हिस्सा है। भागवत ने जोर दिया कि धर्म केवल कर्मकांड और खान-पान की आदतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सत्य, शुचिता, करुणा और तपस्या के चार सिद्धांतों का पालन करने के बारे में है।

*मुख्य बिंदु:*

– *धर्म और अधर्म के बीच लड़ाई*: भागवत ने कहा कि वर्तमान समय में धर्म और अधर्म के बीच एक लड़ाई चल रही है, और हमें अपनी शक्ति दिखानी होगी ताकि बुराई को नष्ट किया जा सके।
– *हिंदू धर्म की व्याख्या*: उन्होंने कहा कि हिंदू धर्मग्रंथों में कहीं भी छुआछूत की बात नहीं कही गई है, और कोई भी ‘ऊंच’ या ‘नीच’ नहीं है।
– *कर्तव्य का महत्व*: भागवत ने जोर दिया कि राजा का कर्तव्य लोगों की रक्षा करना है, और अगर कोई बुरी नजर डालता है तो उसके पास कोई विकल्प नहीं बचता।
– *धर्म के ऊपर एक धर्म*: उन्होंने कहा कि धर्म के ऊपर एक धर्म है, जो अध्यात्म है, और हमें इसे समझने की आवश्यकता है।

*पहलगाम आतंकी हमले पर बयान*

आरएसएस प्रमुख ने पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में भी बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म पूछकर लोगों की हत्या करते हैं, वे कट्टरपंथी हैं, और ऐसा आचरण राक्षसी प्रवृत्ति का परिचायक है। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों या नागरिकों ने कभी किसी की धर्म पूछकर हत्या नहीं की, और हिंदू कभी भी धर्म पूछकर हत्या नहीं करते ¹।

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