CJP ने वापस लिया 5 सितंबर का ‘दिल्ली मार्च’, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के आश्वासन के बाद बड़ा फैसला
नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपने दिल्ली मार्च को वापस लेने का फैसला किया है। संगठन के प्रवक्ता एवं सह-संयोजक सौरव दास ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश को देखते हुए संगठन ने मार्च का आह्वान वापस लेने का निर्णय लिया है।
सुप्रीम कोर्ट में हुआ अहम घटनाक्रम
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सौरव दास ने CJP की ओर से मार्च वापस लेने की जानकारी दी। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की दिशा में उठाए गए कदमों और आश्वासन के बाद CJP ने अपना रुख बदल दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में राहत देते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने का आदेश भी दिया। यह कार्रवाई केंद्र सरकार की ओर से अदालत के समक्ष रखे गए रुख के बाद हुई।
क्या था 5 सितंबर के मार्च का कार्यक्रम?
CJP ने इससे पहले 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने का ऐलान किया था। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से नई दिल्ली स्थित पुलिस मुख्यालय तक जाना था। संगठन ने प्रदर्शन का उद्देश्य छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों तथा कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को उठाना बताया था।
CJP की ओर से पहले आरोप लगाया गया था कि 25 जुलाई को हुई बातचीत के दौरान सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने सहित कई मुद्दों पर आश्वासन दिया गया था, लेकिन इन आश्वासनों को लागू करने में देरी हुई। इसी के बाद संगठन ने फिर से आंदोलन का ऐलान किया था।
केंद्र के आश्वासन के बाद बदला फैसला
मंगलवार की सुनवाई में केंद्र की ओर से प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों और सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों को लेकर अदालत को आश्वस्त किया गया। इसके बाद CJP ने मार्च वापस लेने की घोषणा कर दी। रिपोर्टों के अनुसार, FIR वापसी के अलावा प्रभावित परिवारों को मुआवजा और आगे की कार्रवाई से जुड़े आश्वासन भी इस पूरे घटनाक्रम का हिस्सा रहे।
CJI सूर्यकांत ने भी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच सद्भावना और खुले संवाद के जरिए समस्याओं के समाधान की बात कही। अदालत का रुख रहा कि यदि दोनों पक्ष सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ें तो विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाया जा सकता है।
अब आगे क्या?
5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस लिए जाने के बाद फिलहाल CJP और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति में नरमी दिखाई दे रही है। हालांकि संगठन ने सरकार के कदमों पर नजर बनाए रखने की बात कही है। यदि आश्वासनों के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई तो आगे की रणनीति पर दोबारा विचार किए जाने की संभावना बनी हुई है।
