🕋अल्लाह तआला’ ने हमें ऐसे ज़माने में पैदा फ़रमाया है कि लोगों ने अपनी ख्वाहिशात का नाम शरीअ़त, हुब्बे जाह का नाम इज्ज़त, तकब्बुर का नाम इल्म, और रियाकारी का नाम तक़वा रख लिया है।
और दिल में कीना को छुपाने का नाम हिल्म, मुजादिला का नाम मुनाज़रा, मुहारबा व बेवकूफी का नाम अज़मत, निफ़ाक़ का नाम वफ़ाक़, आरजू व तमन्ना का नाम जुहद, हिज़याने तबअ़ का नाम माअ़रेफ़त, नफ़्सानीयत का नाम मुहब्बत, इलहाद का नाम फ़क़्र, इन्कारे वजूद का नाम सुफूत, बे-दीनी व ज़न्देक़ा का नाम फ़ना, और नबीए करीम ﷺ की शरीअ़त को तर्क करने का नाम तरीक़त रख लिया है।
और अहले दुनिया की आफ़तों को मुआ़मला कहने लगे हैं।
👉इसी बिना पर अरबाबे मआनी और आ़रिफ़ाने हक़ीक़त ने उन लोगों से किनारा-कशी इख़्तियार कर रखी है और गोशए खिलवत में रहना पसन्द कर लिया है।
इन झूटे मुद्दईयाने जहान का ऐसा ग़लबा हो गया है जिस तरह ख़िलाफते राशिदा के इख़्तेताम के बाद अहले बैते अतहार रिज़वानुल्लाह अ़लैहिम अजमईन’ पर आले मरवान का ग़लबा हो गया था।
इस हक़ीक़त का इन्केशाफ़ शहनशाहे अहले हक़ाइक़, बुरहाने तहक़ीक व दक़ाइक हज़रत अबू बकर दासती रहमतुल्लाह अलैह’ ने क्या खूब कहा है:-👇
👉वह फ़रमाते हैं कि_
हम ऐसे दौर में फंस गए जिसमें न तो इस्लाम के आदाब हैं और न जाहिलीयत के अख़लाक हैं और न आम इंसानी शराफ़त के तौर वह तरीक़।
👉हज़रत शिबली अलैहिर्रहमा’ फ़रमाते हैं कि अरब के शायर मुतनब्बी का यह शेअ़र ज़मानए हाल के लोगों की बिल्कुल सही तस्वीर है:-👇
अल्लाह से दुनियादारों की तमन्ना ऊँट सवार की मंज़िल है
तो जो भी ग़म से दूर है वही आखिरत में अ़ज़ाब पाने वाला है।
📕कशफुल महजूब’ पेज़ नं-34/35)
🌹मरवी है कि हुज़ूर ﷺ का एक मुर्दा बकरी के पास से गुज़र हुवा आप ने फ़रमाया क्या येह बकरी अपने मालिक को पसन्द है? सहाबए किराम अज़मइन’ ने अर्ज़ की इस की बदबू ही की वज्ह से तो यहां फेंक दिया गया है।
आप ﷺ ने फ़रमाया ब ख़ुदा! दुन्या अल्लाह तआला’ के हां इस मुर्दा बकरी से भी ज़्यादा बे वकार है, अगर अल्लाह तआला’ के हां दुन्या का मकाम मच्छर के पर के बराबर भी होता तो कोई काफ़िर इस दुन्या से एक घूंट भी पानी न पी सकता।
🌹फ़रमाने नबवी ﷺ है कि दुन्या की मह़ब्बत हर बुराई की बुन्याद है।
📗मुकाशफ़तुल क़ुलूब’ बाब-31, पेज़ नं-210)
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👤मुझे अपनी और सारी दुनिया के लोगो के इस्लाह की कोशिश करनी है. إن شاء الله عزوجل
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