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अव्यवस्था के दोषियों का चालान कौन करेगा?

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कोरोनावायरस के संक्रमण के फैलने के साथ ही हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। उत्तर प्रदेश में भी हालात खराब होते चले जा रहे हैं एक शहर से दूसरे शहर में स्थिति बदतर होती चली जा रही है मुख्यमंत्री खुद आईसोलेशन में हैं उन्होंने हुक्म जारी कर दिया है कि बगैर मास्क पकड़े जाने पर 1000 रू दूसरी बार पकड़े जाने पर उसका 10 गुना यानी ₹10000 जुर्माना लगेगा जुर्माना लागू करके सरकार साबित क्या करना चाहती है जनता अपनी जरूरत के लिए पेट भरने के लिए अपनी जिंदगी के लिए तो घर से बाहर निकलेगी या तो कोरोना से मरेगी या फिर भूख से। जिनके पास पैसा है उनको मध्यमवर्ग से नीचे वाले लोगों का ख्याल नहीं है वह वहां तक आकर सोच भी नहीं सकते क्योंकि जिस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है वह आसानी से नहीं समझा जा सकता। जो इंसान कुआं खोद कर पानी पीता था जो प्राइवेट काम करके खाता कमाता है उसका व्यवसाय बंद हो जाए उसके पास जमा पूंजी नहीं हो वो क्या करेगा वह अपना घर कैसे चलाएगा। इस पर सरकार को बिल्कुल चिंता नहीं है क्योंकि उसकी चिंता तो इस पर है की चालान कैसे किया जाए। सवाल यह है यही जनता पैसा देकर के सुविधा लेने के लिए अस्पतालों के दरवाजे पर जाती है तो उसको सुविधाएं क्यों नहीं मिलती है बेड क्यों नहीं मिलता है। सिलेंडर की सुविधा क्यों नहीं मिलती डॉक्टर का ट्रीटमेंट क्यों नहीं मिलता है। ऐसे में जब जनता को सुविधाएं नहीं मिल रही है तो सरकार का चलाना कौन करेगा?
एक तो कोई काम हो नहीं रहा है उस पर से जो आपदा है जो परेशानियां हैं उसको छुपाने की कोशिश की जा रही है श्मशान घाट को टीन की चादरों से चारों तरफ से छुपाया जा रहा है लेकिन चारों तरफ से छुपा के जनता से तो छुपा लेंगे लेकिन जो नीली छतरी वाला ऊपर से देख रहा है उससे कैसे छुपाया जाएगा?
क्या सरकार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह जहां जगह पर जो पुलिस वाले चेकिंग कर रहे हैं उनको मास्क दे दिया जाए जो भी जनता बगैर मास्क के दिखे उसको फौरन मास्क दिया जाए अगर वह नहीं लगाती तो बार-बार मास्क दीजिए इसमें नुकसान क्या है लाखों करोड़ों अरबों रुपए आपके पास है हर तरीके से आप जनता से वसूल रहे हैं अगर आप कुछ मास्क एक इंसान को बांट देंगे तो क्या दिक्कत हो जाएगी ठीक है इंसानी फितरत है हो सकता है आप दें और वह ना लगाएं दोबारा दीजिए तीसरी बार दीजिए चौथी बार दीजिए देने में क्या दिक्कत है।
जब इंसान अपना सरकारी काम कराने के लिए चार छः बार दौड़ता है तो अगर आप जनता को मास्क दो चार बार दे देंगे तो क्या दिक्कत है!
और बेवकूफ बनाने का धंधा बंद किया जाए प्राथमिक उपचार फौरन बहाल किया जाए जब तक इंसान को फर्स्ट एड नहीं मिलेगी वह परेशानियों में ऐसे ही घिरा रहेगा। इस बात को सरकार शासन प्रशासन कब समझेगा। सुबह से शाम तक फेसबुक व्हाट्सएप पर मौत की खबरें देखकर के अब दिमाग एकदम खराब हो चुका है।
अब सरकार से यही गुजारिश है कि वह सरकारी बिल्डिंग्स चौक स्टेडियम और लखनऊ के दूसरे स्टेडियम को कोविड-19 सेल के रूप में फौरन डेवलप करें और जो प्राइवेट और दूसरे अस्पताल हैं वहां पर प्राथमिक चिकित्सा उपचार तुरंत बहाल कराएं। यकीन मानिए स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
ब्यूरो चीफ दि रिवोल्यूशन न्यूज़

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