भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान से फोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध‑तनाव और शांति‑स्थिरता के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस वार्ता के बाद पीएम मोदी ने दुनिया को एक बार फिर “संवाद और कूटनीति” के ज़रिए संकट का समाधान करने का संदेश देते हुए भारत को शांति और स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाने वाला देश बताया। �बातचीत की पृष्ठभूमिप्रधानमंत्री मोदी की यह बातचीत ऐसे समय हुई जब ईरान और इज़राइल–अमेरिका के बीच जंग जारी है और मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस घटनाक्रम में हज़ारों नागरिक मारे गए हैं और होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बंद होने से वैश्विक तेल और व्यापार संबंधों पर भी असर पड़ रहा है। �पीएम मोदी का बयान: शांति और कूटनीतिफोन वार्ता के बाद पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट (X) पर लिखा कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से “क्षेत्र की गंभीर स्थिति” पर विस्तार‑से बात की और सैन्य संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत युद्ध की बजाय संवाद और कूटनीति के रास्ते को हमेशा प्राथमिकता देता है। �पीएम मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि मध्य पूर्व के देशों के बीच तनाव तत्काल कम किया जाना चाहिए और क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता की शीघ्र बहाली भारत की प्राथमिक चिंता है। उन्होंने दोहराया कि संकट का कोई स्थायी समाधान “बातचीत” से ही बन सकता है, न कि हथियारों से। �गरीब और निर्दोष लोगों की सुरक्षापीएम मोदी ने युद्ध में मारे गए नागरिकों और गरीब–कमज़ोर तबके के लोगों की स्थिति पर भी गहरी चिंता ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि युद्ध का सबसे ज़्यादा नुकसान निर्दोष नागरिकों, गरीबों और वहाँ काम कर रहे मज़दूरों को होता है। इसलिए भारत की नीति वहाँ के निर्दोष लोगों, शामिल देशों के नागरिकों और विशेषकर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। �वीडियो और रिपोर्ट के आधार पर भी बताया गया है कि पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई को लेकर भारत की प्राथमिकता साफ रूप से व्यक्त की, ताकि किसी भी तरह की जान‑माल की हानि से बचा जा सके। �व्यापार, ऊर्जा और समुद्री मार्गबातचीत में पीएम मोदी ने होर्मुज़ स्ट्रेट सहित अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निर्बाध खुली रहने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए वैश्विक व्यापार, ज़रूरी सामान और ऊर्जा (तेल आदि) की निर्बाध आपूर्ति अत्यंत ज़रूरी है। इन मार्गों के बंद होने से सामान्य जनता को भरा महँगाई और संकट का असर देखना पड़ता है। �इसी बातचीत के दौरान ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने भी प्रधानमंत्री मोदी को ईरान की मौजूदा सुरक्षा और आर्थिक स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की और दोनों नेताओं ने भविष्य में भी नियमित संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। �भारत की भूमिका: शांति‑पक्षधर देशपीएम मोदी ने अपने विस्तृत बयान में एक बार फिर भारत की भूमिका “मध्य पूर्व और दुनिया भर में शांति और स्थिरता का समर्थक” देश के रूप में दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रहित के साथ‑साथ ग्लोबल डिप्लोमेसी में भी शांति, वार्ता और सहयोग का संदेश देता रहेगा। �ईरान के राष्ट्रपति ने भी इस बातचीत के बाद पीएम मोदी के शांति‑पक्षधर रुख और तनाव कम करने की अपील के लिए धन्यवाद दिया तथा भारत को क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्वीकार किया। �एडिटरियल नोट (संपादकीय टिप्पणी)यह बातचीत न केवल भारत की विदेश नीति को शांति‑केंद्रित बताती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे भारत जैसे विकासशील देश ग्लोबल क्राइसिस में भी निष्पक्ष और नियंत्रित रुख अपना सकते हैं। ईरान के राष्ट्रपति से प्रत्यक्ष संवाद और गरीब–नागरिकों की सुरक्षा पर ज़ोर भारत की नीति को नैतिक और मानवतावादी आधार भी देता है, जो वर्तमान युद्ध‑पृष्ठभूमि में विशेष महत्व रखता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर की बात, दुनिया को अमन‑शांति का पैगाम भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर जोरलीड:





