मरहूम जावेद मुर्तज़ा के जीवन की संक्षिप्त जानकारी

जावेद मुर्तज़ा का जन्म 24 नवंबर 1948 को हुआ था। उनके पिता माननीय न्यायाधीश मुर्तज़ा हुसैन थे, जो लखनऊ के यूनिटी लॉ कॉलेज के संस्थापक थे।
जावेद मुर्तजा़ ने विज्ञान विषयों में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, लखनऊ के हेवेट कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में इंजीनियरिंग कोर्स पूरा किया। इसके बाद, जावेद मुर्तज़ा ने उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में शामिल हुए, लेकिन उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था।
उच्च न्यायालय में अपने मामले के लिए लड़ते हुए, जहां जावेद मुर्तज़ा ने स्वयं उपस्थित होकर अपना मामला रखा, तब उन्होंने तय किया कि समय की पुकार उनके लिए कानूनी पेशा है। इस प्रकार, एक इंजीनियर से एक वकील बनने के लिए एक नया अध्याय शुरू हुआ, जिसने लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। जावेद मुर्तज़ा ने अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू की और गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी।
उनकी कानूनी प्रैक्टिस ने उन्हें शिया वक्फ बोर्ड, पंजाब नेशनल बैंक आदि जैसे विभिन्न संगठनों के लिए स्टैंडिंग काउंसल के रूप में स्थापित किया।
अपने कार्यक्षेत्र के अलावा, जावेद मुर्तज़ा ने धार्मिक और आध्यात्मिक अध्ययन में गहरी रुचि ली और धार्मिक शिक्षाओं पर कई पुस्तकें लिखीं। उन्होंने धर्म के व्यावसायीकरण के किसी भी रूप की निंदा की और उनकी धार्मिक दर्शन का केंद्र बिंदु धर्म की बेहतर और सरल समझ पर केंद्रित था। वह लखनवी तहज़ीब के प्रतीक थे।
जावेद मुर्तज़ा अंग्रेजी, उर्दू और अरबी भाषा में निपुण थे।
जावेद मुर्तज़ा का निधन 10 नवंबर 2009 को हुआ था और उनका अंतिम संस्कार न्यायाधीशों, वकीलों, विभिन्न मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों और विभिन्न वर्ग व समुदायों कई प्रमुख नागरिकों की उपस्थिति में किया गया था।




