Home धर्म चर्चा बुराई पर अच्छाई की जीत दशहरा हमेशा संदेश देता है

बुराई पर अच्छाई की जीत दशहरा हमेशा संदेश देता है

0
बुराई पर अच्छाई की जीत दशहरा हमेशा संदेश देता है

हिंदू धर्म में दशहरा क्यों मनाया जाता हैदशहरा, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर में पड़ता है। दशहरा का उत्सव मुख्य रूप से भगवान राम की रावण पर विजय और माँ दुर्गा की महिषासुर पर जीत से जुड़ा है। यह त्योहार नौ दिन तक चलने वाले नवरात्रि के समापन के साथ मनाया जाता है।धार्मिक मान्यताएंहिंदू धर्म में दशहरा की धार्मिक मान्यताएं दो प्रमुख कथाओं पर आधारित हैं:रामायण और भगवान राम की विजय: दशहरा का सबसे प्रमुख कारण भगवान राम द्वारा लंकापति रावण पर विजय है। रामायण के अनुसार, रावण ने भगवान राम की पत्नी सीता का अपहरण कर लिया था। भगवान राम ने अपनी सेना, जिसमें हनुमान, सुग्रीव और अन्य वानर शामिल थे, के साथ लंका पर आक्रमण किया और रावण का वध किया। यह घटना दशमी तिथि को हुई, जिसे विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है।
यह पर्व बुराई (रावण) पर धर्म और सत्य (राम) की जीत का प्रतीक है।

माँ दुर्गा और महिषासुर का वध: दूसरी मान्यता के अनुसार, दशहरा माँ दुर्गा द्वारा राक्षस महिषासुर के वध का उत्सव है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर ने देवताओं को परेशान किया था। माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक उससे युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया। यह विजय भी दशहरा के रूप में मनाई जाती है।
नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा की पूजा की जाती है, और दशहरा उनके विजय के उत्सव के रूप में देखा जाता है।

भगवान राम से संबंधित इतिहासरामायण, जो महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित है, भगवान राम के जीवन और उनके कार्यों का वर्णन करती है। राम, अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र और भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। उनकी कहानी इस प्रकार है:राम का जन्म और निर्वासन: राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। राजा दशरथ की चार पत्नियों में से कौशल्या के पुत्र थे। राम को उनके सौतेली माता कैकेयी के कहने पर 14 वर्ष का वनवास मिला, जिसके दौरान उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण उनके साथ गए।
सीता का अपहरण: वनवास के दौरान रावण ने सीता का अपहरण कर लिया। रावण लंका का राजा और एक महान विद्वान था, लेकिन उसका अहंकार और अधर्मी व्यवहार उसकी बुराई का कारण बना।
रावण पर विजय: राम ने हनुमान, सुग्रीव, जामवंत और वानर सेना की सहायता से लंका पर चढ़ाई की। दसवें दिन उन्होंने रावण का वध किया और सीता को मुक्त कराया। इस विजय को दशहरा के रूप में मनाया जाता है।
राम का अयोध्या वापसी: रावण के वध के बाद राम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे, जिसे दीपावली के रूप में मनाया जाता है।

दशहरा से मिलने वाली शिक्षादशहरा हमें कई महत्वपूर्ण उपदेश देता है, जो भगवान राम के जीवन और उनके कार्यों से प्रेरित हैं:सत्य और धर्म का पालन: भगवान राम ने हर परिस्थिति में धर्म और सत्य का पालन किया। उनके जीवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
धैर्य और संयम: राम ने अपने वनवास और युद्ध के दौरान धैर्य और संयम बनाए रखा। यह हमें सिखाता है कि जीवन की चुनौतियों का सामना शांति और दृढ़ता से करना चाहिए।
बुराई पर अच्छाई की जीत: रावण का वध बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह हमें प्रेरित करता है कि चाहे कितनी भी मुश्किलें हों, सत्य और अच्छाई अंततः जीतती है।
नारी सम्मान: सीता के प्रति राम का प्रेम और सम्मान हमें महिलाओं के प्रति सम्मान और उनकी रक्षा की भावना सिखाता है।
एकता और सहयोग: राम ने अपनी सेना में विभिन्न प्रजातियों और समुदायों को एकजुट किया। यह हमें सिखाता है कि एकता और सहयोग से बड़े से बड़े लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं।

दशहरा के उत्सव की परंपराएँरामलीला: देशभर में दशहरा के दौरान रामलीला का आयोजन होता है, जिसमें रामायण की कहानी को नाटक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह नाटक रावण के वध के साथ समाप्त होता है।
रावण दहन: दशहरा के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है, जो बुराई के अंत का प्रतीक है।
शस्त्र पूजा: इस दिन शस्त्रों की पूजा की जाती है, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है।
माँ दुर्गा की पूजा: कई स्थानों पर माँ दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन दशहरा के दिन किया जाता है।

न्यूज़ और समसामयिक जानकारीहाल के वर्षों में दशहरा के उत्सव को लेकर कुछ महत्वपूर्ण समाचार और रुझान देखे गए हैं:पर्यावरण के प्रति जागरूकता: कई जगहों पर रावण दहन के दौरान पर्यावरण को नुकसान न हो, इसके लिए पर्यावरण-अनुकूल पुतलों का उपयोग किया जा रहा है।
सांस्कृतिक आयोजन: भारत के विभिन्न हिस्सों, जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, और कर्नाटक में बड़े पैमाने पर रामलीला और मेले आयोजित किए जाते हैं। मैसूर का दशहरा उत्सव विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
सुरक्षा और व्यवस्था: बड़े आयोजनों के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। हाल के समाचारों में, कुछ शहरों में ड्रोन और सीसीटीवी के उपयोग से निगरानी की गई।
आधुनिकता का प्रभाव: कई जगहों पर रामलीला को डिजिटल और सिनेमाई तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे युवा पीढ़ी भी इससे जुड़ रही है।

निष्कर्षदशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और नैतिक उत्सव है, जो हमें सत्य, धर्म, और एकता का महत्व सिखाता है। भगवान राम का जीवन और उनकी रावण पर विजय हमें प्रेरित करती है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियाँ आएँ, सही मार्ग पर चलकर हम विजय प्राप्त कर सकते हैं। यह पर्व हमें अपने अंदर की बुराइयों (अहंकार, क्रोध, लोभ) को समाप्त करने और अच्छाई को अपनाने की प्रेरणा देता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here