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मनुष्य भले भूल जाए, लेकिन पशु नहीं भूलते: बेंगलुरु में मोहम्मद खातून की अंतिम विदाई पर बंदर का भावुक अलविदा

बेंगलुरु से आई यह घटना दिल को भीतर तक छू लेने वाली है। मोहम्मद खातून ने अपना पूरा जीवन पशु-पक्षियों की सेवा, उनकी देखभाल और उनकी तकलीफें कम करने में लगा दिया था। उनके निधन के बाद जब एक बंदर उनकी देह के पास आया, तो उसने जिस तरह उन्हें गले लगाने की कोशिश की, वह दृश्य हर संवेदनशील दिल को भावुक कर देने वाला था।
यह घटना केवल एक वीडियो नहीं, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच निभाए गए सच्चे रिश्ते की मिसाल है। जब बहुत से रिश्ते स्वार्थ, दूरी और व्यस्तताओं में बिखर जाते हैं, तब पशु-पक्षी बिना बोले भी अपना अपनापन दिखा जाते हैं। मोहम्मद खातून ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि जीव-जंतुओं से प्रेम करना केवल सेवा नहीं, बल्कि एक पुण्य और इंसानियत का सबसे सुंदर रूप है।
उनके निधन के बाद बंदर का यह व्यवहार मानो यह कह रहा था कि सच्ची सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती। जिसे आपने जीवन भर सहारा दिया, वह अंतिम क्षणों में भी आपको अपना समझकर पास आता है। यह दृश्य केवल दुख का नहीं, बल्कि प्रेम, कृतज्ञता और मानवता की गहराई का प्रतीक बन गया।
आज जब समाज में संवेदनाएं कमजोर पड़ती जा रही हैं, यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रेम की भाषा केवल मनुष्य नहीं, जीव-जंतु भी समझते हैं। जरूरत इस बात की है कि हम भी मोहम्मद खातून जैसी सोच अपनाएं और हर जीव के प्रति करुणा, दया और जिम्मेदारी का भाव रखें।

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