जी हां आप सही सुन रहे हैं मैं गंगा हूं वही गंगा जो कभी निर्मल स्वच्छ और लोगों के आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी। मैं वही गंगा हूं जो भारत देश के न जाने कितने शहरों को आपस में मिलाती थी। जी हां मैं वही गंगा हूं जो इतनी विस्तृत हूं कि एक शहर से दूसरे शहर और दूसरे से तीसरे से होती हुई असंख्य शहरों को आपस में जोड़ देती थी।
मैं गंगा हूं!
मैं वही गंगा हूं जिस पर अचानक देश के प्रधान सेवक का प्यार उमड़ आया था और कहा था कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है जी मैं वही मां गंगा हूं जिसने प्रधान सेवक को बुलाया था लेकिन अफसोस प्रधान सेवक नहीं आया बल्कि उसकी जगह न जाने कितने अनगिनत हजारों शवों को भेज दिया।
मैं गंगा हूं!
जी मैं वही गंगा हूं जिसके बहुत से नाम आप जानते हैं कोई मुझे भागीरथी कहता है कोई मुझे मंदाकिनी कहता है कोई अलकनंदा के नामों से पुकारता है लेकिन आज मुझे लाशों के सागर का नाम दे दिया गया मैं वही गंगा हूं जिसकी आप सदियों से पूजा करते आए थे मैं आपकी आस्था का एक प्रतीक थी और हमारे आपके बीच में वैसे ही रिश्ता था जैसे मां और बच्चे के बीच में अटूट रिश्ता होता है मेरे आंचल में हमेशा साफ स्वच्छ जल रहता था लेकिन आप लोगों ने मुझे किसी काबिल नहीं रखा कभी नारियल फेंक दिया कभी सड़े हुए फल फेक देते थे कभी गंदगी उड़ेल देते थे कभी सड़ी हुई मालाएं फेंक देते थे कभी भगवानों की मूर्तियों को लाकर हमारे आंचल में भर देते थे और अब तो हद हो गई अब तो आपने ला करके मेरे आंचल को लाशों से भर दिया है और यह लाशें किसी और की नहीं मेरे अपने बच्चों की है।
मैं गंगा हूं!
मैं वही गंगा हूं जो उत्तर प्रदेश में 1140 किलोमीटर का लंबा सफर तय करते हुए बिहार में प्रवेश करती हूं। लेकिन मेरे सफर को आज रोक दिया गया हर एक कदम पर मुझे लाशें दिखती हैं। पिछली एक सदी से यानी 100 साल से मैं खामोश थी हालांकि अत्याचार हो रहे थे लेकिन अत्याचारों की सीमा पार नहीं हुई थी लेकिन अब 100 साल बाद एक बार फिर अत्याचारों की सीमा पार हो गई और मेरे सामने लाशों का ढेर रख दिया गया आज से 100 साल पहले 1918 में जब पूरी दुनिया में स्पेनिश फ्लू महामारी फैली थी तो भी मेरे आंचल में जहां तक नजर जाती थी वहां तक आप मेरे आंचल में इंसानी लाशें ही देख सकते थे 100 साल के बाद एक बार फिर वही मंजर आप देख रहे हैं इससे जाहिर हो रहा है कि मानवता शून्य से भी नीचे जा चुकी है। देश में और देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसा मौत का तांडव चल रहा है हर जगह बेबसी और लाचारी दिखाई दे रही है।
मैं गंगा हूं!
मैं गंगा हूं आज मुझे बहुत तकलीफ हो रही है इतनी तकलीफ जितनी पहले कभी नहीं हुई मैंने अपना आंचल आपके प्यार और स्नेह के लिए फैलाया था लेकिन आपने प्यार और स्नेह देने के बजाय लाशों का तोहफा दे दिया है।
मैं गंगा हूं!
मैं आपसे नाराज हूं क्योंकि आपने धोखा दिया है सिर्फ मेरे साथ धोखा नहीं किया बल्कि मेरे बच्चों के साथ भी धोखा किया है चाहे वह रोजगार के नाम पर धोखा हो चाहे वह कोरोना के नाम पर धोखा हो चाहे वह जीविका के नाम पर धोखा हो चाहे वह शिक्षा के नाम पर धोखा हो चाहे वह समृद्धि के बारे में धोखा हो हर क्षेत्र में आपने हमारे बच्चों को धोखा दिया इसलिए मैं आपसे नाराज हूं। मैं गंगा हूं!
मैं आपका भी इंतजार कर रही हूं प्रधान सेवक जी।
स्वागत है।
मैं गंगा हूं!
जयहिंद
सैय्यद एम अली तक़वी
ब्यूरो चीफ दि रिवोल्यूशन न्यूज़