मणिपुर की रोशिबिना ने एशियाई खेलों में मेडल जीता है। उनके माता-पिता और भाई-बहन पांच महीने से हिंसा में फंसे हैं लेकिन इस बीच रोशिबिना श्रीनगर में तैयारियां करती रहीं। रोशिबिना खेल में आगे बढ़ सकें, इसके लिए उनके पिता ने अपनी जमीन बेच दी। हिंसा के दौरान वे कहते रहे – तुम हमारी चिंता मत करो, देश के लिए मेडल जीतने पर ध्यान दो। रोशिबिना ने देश का मान बढ़ाया है। मेडल जीतने के बाद उन्होंने मणिपुर में हिंसा रोकने की अपील की है।
इंदौर की सुदीप्ति हजेला, राजस्थान की दिव्याकृति सिंह ने विपुल ह्रदय छेड़ा और अनुष अगरवाला के साथ मिलकर घुड़सवारी में 41 साल बाद देश को मेडल दिलाया है।
बागपत, उत्तर प्रदेश के अखिल श्योराण ने एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता है। वे एक किसान के बेटे हैं। पिता ने उन्हें कर्ज लेकर शूटिंग के लिए राइफल दिलाई थी।
पंजाब के एक किसान की बेटी सिफ्त कौर समरा ने शूटिंग का रिकॉर्ड तोड़ते हुए गोल्ड जीता है।
मेरठ, उत्तर प्रदेश की किरण बालियान ने 1951 के बाद शॉटपुट में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं।
हरियाणा की पलक गुलिया, ईशा सिंह, मनु भाकर और रिदम सांगवान ने मेडल जीतकर देश का झंडा ऊंचा किया है।
भारतीय निशानेबाजों ने छह गोल्ड समेत 18 मेडल जीतकर इतिहास रचा है। एशियाई खेलों में भारत के कुल 38 मेडल हो चुके हैं। मेडल जीतने वाले सभी खिलाड़ियों को खूब बधाई।
खिलाड़ियों के संघर्ष की कहानियां और उनकी उपलब्धियां हम सबकी प्रेरणा हैं। देश के लिए मेडल जीतने वाले ये सभी खिलाड़ी हमारा गर्व हैं।





