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एरा मेडिकल कॉलेज डॉक्टरों ने फिर इंसानियत को बचाया,

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वैसे तो एरा मेडिकल कॉलेज लखनऊ को इंसानियत को क़ायम रखने के लिए कई बार सम्मानित किया गया है, उसी क्रम में एक वाक़िया और जुड़ गया,

ऐसी स्क्रिप्ट को हम लोगों ने कई फिल्मों और खासकर मुन्ना भाई एमबीबीएस में ऐसा किरदार निभाते मशहूर एक्टर संजय दत्त को देखा है, प्राप्त जानकारी के अनुसार एरा मेडिकल कॉलेज हरदोई रोड लखनऊ के आईसीयू मैं हाइपरटेंशन और बीमारियों को उपचार के लिए भर्ती मरीज सैयद मोहम्मद जुनेद इकबाल आयु लगभग 51 वर्ष ने आईसीयू इंचार्ज डॉ मुसतहसीन से अपनी दो बेटियों का निकाह करवाने की हाजत जताई (या यू कहूं की बेटियों की जिम्मेदारी से मुक्त होने की आखिरी ख्वाहिश की ) इस संबंध में आईसीयू इंचार्ज ने एरा प्रिंसिपल डॉ एम एम ए फ़रीदी से चर्चा करने के उपरांत दोनों डॉक्टरों ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए,
एरा मेडिकल कॉलेज आईसीयू मे अपनी उपस्थिति मे मुस्लिम रीत रिवाज के हिसाब से केवल दूल्हा और मौलाना को आईसीयू में दाखिल होने की अनुमति देते हुए निकाह करवाया,
एरा मेडिकल कॉलेज से खबर बाहर आते ही लोगों ने ऐसे कार्यों की बहुत प्रशंसा की और लोगों ने यहां तक कहां की ऐसे डॉक्टरों को सम्मानित करना चाहिए, ताकि दूसरे डॉक्टर इससे प्रेरणा ले,
शायद डॉक्टर ने उनकी बेटियों की शादी उनके बीमारी की मुख्य वजह समझते हुए और इसको उपचार की संजीवनी समझते हुए किया,
क्योंकि आजकल हमारे समाज में बेटियों का निकाह करना एक सौदा होता है,
उस सौदे को पूरा करने के लिए मां-बाप पूरी जिंदगी की कमाई खर्च करने के बाद भी पूरा नहीं कर पाते,
ऐसे ही रीति रिवाज को आसान करने के लिए प्रोफेट मुहम्मद ने बेटी के माता-पिता पर शादी की जिम्मेदारी नहीं बराबर कर दी, और कह दिया कि लड़का पक्ष बेटी के बाप को जितना मेहर दे उतने में ही निकाह और दहेज दिया जाएजो, यह मुख्य कार्य हमारे मुस्लिम चलन में ना बराबर रह गया है जिसकी वजह से बेटी के मां-बाप को उनकी शादी की चिंता उनको चिता तक पहुंचा देती है,

फ्रीलांसर.
शाबू ज़ैदी

7617032786

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