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आज मशहूर वैज्ञानिक हेनरिक रुडोल्फ़ हर्ट्ज़ की पुण्य तिथि है।

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1862-64 में जेम्स क्लर्क मैक्सवेल (1831 – 1879) ने विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र (इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फ़ील्ड) के लिए समीकरण विकसित किए और भविष्य के लिये सुझाव दिये कि किसी भी क्षेत्र (इलेक्ट्रिक या मैग्नेटिक) में परिवर्तन से दूसरे क्षेत्र का निर्माण होता है इस परिवर्तन से एक तरंग (वेव-wave) पैदा होती है जिसमें इलेक्ट्रिक और मैग्नेटिक फ़ील्ड एक दूसरे के लंबवत होते हैं और वेव की दिशा के लंबवत भी होते हैं। मैक्सवेल ने यह भी भविष्यवाणी की थी कि ऐसी विद्युत चुम्बकीय तरंगों की चाल प्रकाश की चाल के बहुत करीब होगी।
यह जर्मन भौतिक विज्ञानी हर्ट्ज़ थे, जिन्होंने पहली बार जेम्स क्लर्क मैक्सवेल के समीकरणों द्वारा भविष्यवाणी की गई विद्युत चुम्बकीय तरंगों के अस्तित्व को निर्णायक रूप से साबित किया था।
हेनरिक रुडोल्फ हर्ट्ज़ का जन्म 22 फ़रवरी 1857 में हैम्बर्ग में हुआ था, जो समृद्ध और सुसंस्कृत हैन्सियाटिक परिवार के अधीन जर्मन परिसंघ का एक संप्रभु राज्य था।
हैम्बर्ग में गेलेहर्टेन्सचुले डेस जोहंनेम (Gelehrtenschule des Johanneums – Academic School of the Johanneum) में अध्ययन के दौरान, हर्ट्ज़ ने विज्ञान के साथ-साथ
अरबी और संस्कृत का भी अध्ययन किया। उन्होंने गुस्ताव किरचॉफ और हरमन वॉन हेल्महोल्ट्ज़ के अधीन ड्रेसडेन, म्यूनिख और बर्लिन में विज्ञान और इंजीनियरिंग का अध्ययन किया। 1880 में, हर्ट्ज़ ने बर्लिन विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की, और अगले तीन वर्षों तक हेल्महोल्ट्ज़ के सहायक के तौर पर पोस्ट-डॉक्टरेट अध्ययन करते रहे।
1885 में, हर्ट्ज कार्लसरुहेर विश्वविद्यालय में पूर्ण प्रोफेसर बन गए। इससे पूर्व 1879 में हर्ट्ज़ को हेल्महोल्ट्ज़ ने सुझाव दिया कि उनको अपने डॉक्टरेट शोध प्रबंध (dissertation) का मैक्सवेल के सिद्धांत के अनुसार परीक्षण करना चाहिए। हेल्महोल्ट्ज़ ने उस वर्ष इस विषय पर प्रशिया एकेडमी ऑफ साइंसेज में “बर्लिन पुरस्कार” की घोषणा भी की थी। लेकिन, हर्ट्ज़ को विशेष कामयाबी हासिल नहीं हो सकी थी। कई बरस बाद, 1886 और 1889 के बीच हर्ट्ज ने प्रयोगशाला में अनेक प्रयोग किये जिनसे मैक्सवेल की विद्युत चुम्बकीय तरंगों को प्राप्त किया जा सका। हर्ट्ज़ ने नवंबर 1887 में अपना एक शोध पत्र “ऑन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इफेक्ट्स प्रोड्यूस्ड बाय इलेक्ट्रिकल डिस्टर्बेंस इन इंसुलेटर” बर्लिन अकादमी में हेल्महोल्ट्ज़ को भेजा। इसके बाद 1888 में एक शोध पत्र में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों को एक सीमित गति से एक निश्चित दूरी तक यात्रा करते हुए दिखाया गया था। हर्ट्ज़ ने अपने अनुसंधान में dipole oscillator के ज़रिये वैज्ञानिक कम्यूनिटी को अचम्भे में डाल दिया था, जो मानते थे कि विद्युत चुम्बकीय तरंगें एक प्रयोगशाला में उत्पादन योग्य नहीं थीं इसी dipole oscillator की परिकल्पना के आधार पर प्लैंक ने क्वांटम थेरी दी थी जिसका यथा स्थान ज़िक्र होगा।
1892 में, हर्ट्ज़ गंभीर माइग्रेन रोग से पीड़ित हो गये और 1 जनवरी 1894 में केवल 36 वर्ष की आयु में ऑपरेशन की जटिलताओं के बाद उनका निधन हो गया। धार्मिक रूप से हेनरिक हर्ट्ज़ अपने पूरे जीवन भर लूथेरियन थे और खुद को यहूदी नहीं मानते थे, क्योंकि उनके पिता ने लूथेरियनिज़्म क़ुबूल कर लिया था। लेकिन, जब हर्ट्ज़ की मृत्यु के दशकों बाद जर्मनी में नाज़ियों ने सत्ता हासिल की, तो उसके अधिकारियों ने हर्ट्ज़ के आंशिक रूप से यहूदी वंश के कारण हैम्बर्ग के सिटी हॉल (राथौस) में सम्मान के प्रमुख स्थान से उनका चित्र हटा दिया था। हर्ट्ज़ की विधवा और बेटियों ने 1930 के दशक में जर्मनी छोड़ दिया और वे इंग्लैंड में बस गये।
आज भारत में नाज़ी उतरन पहनने और भोंडी नक़ल करने वाला गिरोह जब अशोक, अकबर या शाहजहाँ के प्रति नफ़रत का इज़हार करता है तो कोई ता’जुब नहीं होता।
– असग़र मेहदी

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