शंघाई सहयोग संगठन (SCO) – कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (CSTO) के शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान मैं तालिबान के कब्जे के करीबन 33 दिन बाद भारत ने बात रखी है। उन्होंने कहा है कि अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम का सबसे अधिक प्रभाव भारत जैसे पड़ोसी देशों पर होगा। और इसलिए, इस मुद्दे पर क्षेत्रीय फोकस और समर्थन जरूरी है। यह जरूरी है कि वैश्विक समुदाय सामूहिक रूप से और उचित विचार-विमर्श के साथ नई प्रणाली की मान्यता पर निर्णय ले। इस मामले पर भारत यूनाइटेड नेशंस का समर्थन करता है।
मोदी अफगानिस्तान मसले को लेकर 4 मुख्य मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा है कि पहला मुद्दा यह है कि अफगानिस्तान में सत्ता-परिवर्तन समावेशी नहीं है, और बिना बातचीत के हुआ है। दूसरे बात उन्होंने कही कि अगर अफगानिस्तान में अस्थिरता और कट्टरवाद बना रहेगा, तो इससे पूरे विश्व में आतंकवादी और चरमपंथी विचारधाराओं को बढ़ावा मिलेगा। अन्य उग्रवादी समूहों को हिंसा के माध्यम से सत्ता पाने का प्रोत्साहन भी मिल सकता है।
पीएम मोदी ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का सिद्धांत होना चाहिए। सीमा पार आतंकवाद और आतंकवाद के वित्तपोषण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए इसकी एक आचार संहिता होनी चाहिए।
