सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में 4जी इंटरनेट बहाली को लेकर तुरंत कोई आदेश देने से किया मना।

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सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में 4जी इंटरनेट बहाली को लेकर तुरंत कोई आदेश देने से मना कर दिया। इसकी जगह पर कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वे एक विशेष समिति बनाएं जो याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई मांग पर विचार करेगा।

कोर्ट के इस कदम को लोगों के मौलिक अधिकारों के हनन के रूप में देखा जा रहा है, जहां कोर्ट ने केंद्र के फैसलों के खिलाफ दायर की गई याचिका का समाधान करने के लिये केंद्र को ही समिति बनाने के लिए कहा है।

लाइव लॉ के मुताबिक जस्टिस एनवी रमना, आर. सुभाष रेड्डी और बीआर गवई की पीठ ने कहा कि कोर्ट की ये जिम्मेदारी है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच बैलेंस बना कर रखें।

उन्होंने कहा, ‘हम ये मानते हैं कि केंद्रशासित प्रदेश संकट की स्थिति में चला गया है. साथ ही साथ कोर्ट को मौजूदा महामारी और मुसीबतों को लेकर उत्पन्न चिंताओं का भी संज्ञान है।

कोर्ट ने कहा, ‘अनुराधा भसीन मामले में हमने कहा था कि पर्याप्त प्रकियात्मक सुरक्षा होनी चाहिए। उसी तर्ज पर हम सचिवों की एक समिति का गठन करने का निर्देश देते हैं जिसमें केंद्र एवं राज्य के गृह मंत्रालय के सचिव, संचार मंत्रालय के सचिव और जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव शामिल होंगे। इस विशेष समिति को ये निर्देश दिया जाता है कि वे याचिकाकर्ताओं के दलीलों की जांच करेंगे और वैकल्पिक सुझाव देंगे।
इससे पहले जम्मू कश्मीर प्रशासन ने 4जी सेवाओं की बहाली का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इंटरनेट का उपयोग करने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है और राज्य बोलने की स्वतंत्रता और इंटरनेट के माध्यम से व्यापार करने के अधिकार पर रोक लगा सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले की कुछ वकीलों ने तत्काल आलोचना की और कोर्ट पर न्यायिक जिम्मेदारी को त्यागने का आरोप लगाया।

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