मुसलमानों ने जकात के पैसे से अस्पताल को आईसीयू वार्ड किया दान।

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    02/6/2020

    जकात इस्लाम का तीसरा स्तंभ (रुकन) है, जिसमें खुशहाल मुसलमानों को अपनी सालाना बचत का 2.5% अनिवार्य रुप से दान करना होता है। जकात के पैसे से गरीबों और जरुरतमंदों की मदद की जाती है, लेकिन महाराष्ट्र के इचलकरंजी शहर के मुसलमानों ने जकात के पैसे का इतना खुबसूरत इस्तेमाल किया कि सारी दुनिया उनकी तारीफ कर रही है। इस शहर के मुसलमानों ने जकात के पैसे से एक अस्पताल को 10 बेड वाला आईसीयू वार्ड दान कर दिया।

    इचलकरंजी शहर महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में पड़ता है। ये छोटा सा शहर मुंबई से 380 किलोमीटर दूर है। इस शहर की कुल आबादी लगभग तीन लाख है। जिसमें 15 प्रतिशत मुसलमान हैं। इचलकरंजी शहर के मुसलमानों ने स्थानीय सरकारी अस्पताल में 10 बेड का आईसीयू वार्ड दान किया है। जिस पर 36 लाख रुपये का खर्च आया है। ये पैसे शहर के मुसलमानों ने इस साल रमजान में ज़कात के रूप में इकट्ठा किया था।
    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ईद के दिन इंदिरा गांधी मेमोरियल सिविल अस्पताल के आईसीयू विभाग का उद्घाटन किया। उद्धव ठाकरे ने मुसलमानों की इस पहल की दिल खोल कर तारीफ की। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अस्पताल के आईसीयू वार्ड का उदघाटन करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि इचलकरंजी में मुस्लिम समुदाय ने आईसीयू यूनिट के लिए 36 लाख रुपये का दान देकर देश के सामने एक आदर्श उदाहरण पेश किया है। उन्होंने ये दिखाया है कि त्योहार कैसे मनाया जाता है।

    इचलकरंजी शहर के मुस्लिमों के एक संगठन ‘समस्त मुस्लिम समाज’ (एसएमएस) ने रमजान के मुकद्दस महीने के दौरान शहर के एकमात्र सरकारी अस्पताल इंदिरा गांधी मेमोरियल सिविल अस्पताल में 10 बेड के आईसीयू यूनिट की सुविधा देने का फैसला किया था। इससे पहले यहां के मरीजों को इलाज के लिए कोल्हापुर और सोलापुर जैसे शहरों में भेजा जाता था।

    अस्पताल के सर्जन डॉ जावेद बागवान ने कहा कि यह इस कस्बे के मुसलमानों का एक बड़ा संदेश है। मुझे नहीं लगता कि भारत में कहीं भी एक पूरे कस्बे के मुसलमानों ने ज़कात के पैसे का इस्तेमाल इस तरह के काम के लिए किया है। इससे हमें कोरोनावायरस से लड़ने में मदद मिलेगी।

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