प्रधानमंत्री मोदी और संघ प्रमुख भागवत का बयान फैसले को जय पराजय के रूप में ना देखा जाये

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सुप्रीम कोर्ट ने आज दिनांक 9 नवंबर को अयोध्या में विवादित स्थल का फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए दूसरी जगह पांच एकड़ भूमि आवंटित की जाए। पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह विवादित स्थान पर मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के अंदर एक ट्रस्ट का गठन करे। पीठ ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि का अधिकार राम लला को सौंप दिया।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति सबको भारतभक्ति की भावना व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने देशवासियों से अपील की है कि शांति, सद्भाव और एकता कायम रखें। उन्होंने कहा कि न्याय के मंदिर ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर दिया। यह फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में आम जनता के विश्वास को और मजबूत करेगा।
इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, यह केस सही निष्कर्ष पर पहुंच गया है। इसे जीत या हार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

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