पंजाब कांग्रेस में कलह थमने के बदले विवाद के नए मोेर्चे खुल जाते हैं। पार्टी में अनुशासनहीनता का आलम यह कि एक नेता की बयानबाजी पर पार्टी नेतृत्व संज्ञान लेता है कि तब तक दूसरा बयान दे देता है। पूरी स्थिति साफ संकेत दे रही है कि पंजाब कांग्रेस पर आलाकमान की पकड़ कमजोर हो चुकी है। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले नेता अधिक ‘बेलगाम’ हो रहे हैं।
दरअसल कांग्रेस में अंदर ही अंदर बाहरी बनाम टकसाली नेताओं की जंग चल रही है। पार्टी में बाहरी बनाम टकसाली की यह आग अब राज्य के वित्तमंत्री मनप्रीत बादल के दामन तक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के राजनीतिक सलाहकार रहे गिद्दड़बाहा के विधायक अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने मनप्रीत बादल के ऊपर अकालियों को फंड देकर खुश करने का गंभीर आरोप जड़ दिया है। यह पहला एसा मौका नहीं है जब कांग्रेस में अनुशासन की मर्यादा तार-तार नहीं हुई हो। इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन के विरुद्ध मोर्चा खोला था तो कांग्रेस के ही मंत्रियों ने कैप्टन के खिलाफ।