धर्म,जाति,मज़हब,क़ौम के नाम पर वोटों का बट जाना किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए घातक होता है: रुबीना मुर्तजा जावेद

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लखनऊ तंजीम अली कांग्रेस सद्र सुश्री रुबीना मुर्तुज़ा जावेद ने एक बयान जारी करते हुए कहां की तंज़ीम अली कांग्रेस हमेशा से इंतेख़ाबात से पहले आवामुन्नास को यह पैग़ाम देती रही है कि वह हालात को देखते हुए अपने ज़मीर की आवाज को सुनकर उसी उम्मीदवार को अपना वोट दें जिसको वह सबसे बेहतर समझें। धर्म, जाति, मज़हब, क़ौम के नाम पर वोटों का बट जाना किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए घातक होता है, इसलिए इनकी की आड़ में राजनीति करना या इनके नाम पर वोट मांगना कभी जनहित या देशहित में नहीं हो सकता। धार्मिक या मज़हबी छवि वाले लोगों या किसी भी धर्म के धर्म गुरुओं का किसी पार्टी विशेष को समर्थन देना अत्यंत दुखद है, क्योंकि यह सांप्रदायिकता को बढ़ावा देता है, इसलिए इससे बचना चाहिए। ऐसे धर्मगुरु ख़ास तौर पर मुस्लिम धर्मगुरु जो किसी पार्टी विशेष को अपने धर्म या संप्रदाय के लिए श्रेष्ठ बताते हैं तो, इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने अपने धर्म से कुछ नहीं सीखा क्योंकि सभी धर्म ख़ास तौर पर इस्लाम धर्म भी सांप्रदायिकता नहीं सिखाते। इस्लाम धर्म की शिक्षा है कि, ईश्वर रब्बुल आलमीन( समस्त संसार का रचयिता है) और रसूल रहमतुल्ल लिल आलामीन (समस्त संसार के लिए रहमत) है, इस शिक्षा के बाद भी यदि कोई मुस्लिम धर्मगुरु किसी पार्टी विशेष को अपने लिए या अपने संप्रदाय के लिए श्रेष्ठ बताता है तो या वह अज्ञानी है या अवसरवादी। किसी भी धर्म के व्यक्ति का अपने धर्म के प्रति निष्ठा का पर्याय यही है कि वह समस्त इनसानो/नागरिकों के हित की बात करें और न्याय का पक्षपाती हो, इसी कर्म में देश हित नीहित है।
ऐसी विचारधारा जो केवल एक ही संप्रदाय, जाति, धर्म के हित की बात करती है वह देश के हित में कैसे कोई योगदान दे सकती है? आप जब भी वोट देने जाएं इन बातों पर एक बार ज़रूर ग़ौर करें फिर अपनी अंतरात्मा के कहने पर जिस को भी बेहतर समझें वोट करें।

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