कोरोना संकट से घुटनों पर खड़ा विश्व।

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हम सुपर पावर हैं। हम टेक्नोलॉजी में सबसे आगे हैं। हमारे पास परमाणु बम है। हमारी मुट्ठी में रिमोट है। ऐसे ही डायलाग दुनिया के अलग-अलग देश एक दूसरे से बोल रहे थे। ऐसा लगता था कि हर देश दूसरे देश को मिटा देना चाहता है। इराक़, सीरिया, अफगानिस्तान, फिलिस्तीन और ना जाने कहां कहां इंसानियत शर्मसार हो रही थी और इंसान का कत्लेआम किया जा रहा था।
आखिर ऐसा क्या हो गया कि पूरी दुनिया इंसानों की जिंदगी बचाने में लग गई?

हुआ कुछ नहीं सिर्फ ब्रह्मांड बनाने वाले ने जिसको लोग भूल गए थे उसने अपने रिमोट का एक बटन दबा दिया और संसार में एक कोरोनावायरस का परिचय करा दिया।
बस पूरी दुनिया घुटनों पर आ गई।
कोरोनावायरस का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। इससे संक्रमित लोगों की संख्या दुनिया में बढ़कर 26 लाख से ज़्यादा हो गई है। दुनिया में कोरोना वायरस ने अब तक कई लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली है।

कोरोनावायरस का सबसे ज्यादा असर अमेरिका में है। अमेरिका में कोरोनावायरस सबसे ज्यादा कहर बरपा रहा है. यहां मरने वाले लोगों की संख्या 45000 के पार हो गई है। इसके अलावा इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में भी कोरोनावायरस से मरने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह सब सुपर पावर देश थे।

आंकड़ों के मुताबिक, अपने आप को सुपर पावर कहने और दूसरे देशों को आंख दिखाने वाले अमेरिका में करीब आठ लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। अमेरिका में संक्रमित संख्या स्पेन, इटली, जर्मनी और फ्रांस के मरीजों की कुल संख्या के लगभग बराबर है।
कोरोना वायरस पर व्हाइट हाउस टास्क फोर्स के सदस्यों ने कोविड-19 से दो लाख लोगों की मौत की आशंका जतायी थी। विश्वभर में कोरोना वायरस के कारण लाखों लोगों की जान जा चुकी है और 24 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं।
विश्व पटल पर यह बात सबको पता है कि कोरोना वायरस सबसे पहले चीन में फैला है। चीन की यह बहुत पुरानी आदत है कि वह विश्व स्तर तक अपनी बहुत सी जानकारी पहुंचने ही नहीं देता। पूरी दुनिया में एक सवाल जरूर पूछा जा रहा है कि क्या यह वायरस चीन द्वारा जानबूझकर फैलाया गया है। क्योंकि वह विश्व की महाशक्ति बनना चाहता है इसलिए जैविक हथियार का इस्तेमाल कर रहा है। मतलब कोरोनावायरस एक महामारी नहीं एक रहस्यमय प्रयोग बन गया है! जिससे दुनिया त्रस्त है।
अमेरिका और चीन की आपसी तू-तू-मैं-मैं पूरे विश्व को प्रभावित करेगी। ऐसा लगता है कि कोरोनावायरस की इस महामारी के बाद एक तरफ चीन होगा और दूसरी तरफ अमेरिका। बाकी देश किधर होंगे यह कहना मुश्किल है क्योंकि अमेरिका सबको आंख दिखाता है और चीनी छोटी आंखों पर जल्दी कोई भरोसा नहीं करेगा। भारत चीन और अमेरिका दोनों से संबंध रखना चाहेगा। क्योंकि यह कोरोनावायरस संकट नकारात्मक वैश्विक संघर्ष को जन्म दे सकता है। इसलिए सभी संबंधित देशों को इस विवाद से बचने के लिए बहुपक्षीय वार्ता से समाधान तलाशना चाहिए। क्योंकि भविष्य में इसका खामियाजा केवल चीन को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को भुगतना होगा।
अभी हाल ही में जिस तरह अमेरिका ने ईरान के साथ सुलूक किया वह दादागिरी दर्शाता है और इस संकट के समय भी उसकी ऐंठन में कोई परिवर्तन नहीं दिखाई दिया। जिससे पता चलता है कि वह इंसानियत से कोसों दूर है।
शायद यह इंसान द्वारा इंसान पर ज़ुल्म करने की सजा है। क्योंकि ईश्वर को सब भूल चुके थे और अपनी ताकत पर घमंड हो गया था। पूरी प्रकृति का निज़ाम और नियम बदला जा रहा था। शायद इंसान तरक्की करते करते ऊपर वाले के ही काम में हस्तक्षेप करने लगा था और यह भूल गया था कि वो सिर्फ़ एक इंसान है। एक मिट्टी का पुतला है।
दुनिया में तरक्की करता हुआ इंसान इंसानियत से बहुत दूर चला गया और जो ताकत ईश्वर ने दी उसी के बल पर अपने से कमज़ोर को दबाने लगा आंखे दिखाने लगा ज़्यादती करने लगा, हमला करने लगा, मारने लगा।
अपनी ऊल-जुलूल हरकतों से उस प्रकृति को अपना दुश्मन बना बैठा। जिसका आनंद लेने के लिए ईश्वर ने पैदा किया था।
आंखे तरेरने और मारने की धमकी देने वाला अमेरिका हो या अपनी ताकत दिखाने वाला चीन या अन्य देश सब घुटनों के बल खड़े होकर जिंदगी की भीख मांग रहे हैं।
दुनिया के देश अपने आप को ईश्वरीय शक्ति के आगे बहुत मज़बूर व लाचार महसूस कर रहे हैं ।
एक कोरोनावायरस से लड़ने की क्षमता किसी में नहीं है। ईश्वर ने दिखा दिया कि ताकत क्या होती है।
विज्ञान में तरक्की करने वाले मुल्क इस वायरस के खिलाफ रास्ता ढूंढ रहे हैं। इंसानियत को ख़त्म करके इंसानों को बचाने का रास्ता ढूंढा जा रहा है। यह मजाक नहीं तो क्या है! कोरोनावायरस ने हर देश की औकात को उजागर कर दिया। ईश्वर ने पुरी दुनिया को घरों में बंद कर दिया और अपनी प्रकृति को फिर से सजाने और संवारने लगा। नतीजा आसमान साफ, पेड़ पौधों को नई जिंदगी, पहाड़ों पर किरणें, नदी, झील, समुंद्र सब साफ़ , वातावरण शांत और शीतल। यह ईश्वर की कार्यप्रणाली है।
भारत में भी इस महामारी ने लोगों को अच्छा सबक दिया है। लोग घरों में हैं। धर्म की दीवार गिर गई लोग एक दूसरे को सहयोग कर रहे हैं। यह बात अलग है कि हमारे पास अच्छी चिकित्सा प्रणाली और संसाधनों की कमी है लेकिन ताली और थाली से काम चल गया। लेकिन कुछ लोग अभी भी शैतान की तरह नफरत की खेती कर रहे हैं। शायद वह भूल गए हैं कि उनका नम्बर भी आ सकता है क्योंकि कोरोनावायरस अभी काफी दिन मेहमान रहेगा।
शायद ईश्वर पूरी दुनिया को एक संदेश दे रहा है कि तुम कुछ नहीं हो, मेरे एक इशारे से तुम खत्म हो सकते हो। आपस में मेल-जोल, प्यार और सद्भावना के साथ रहो। धर्म के आधार पर नफरत का खेल बंद करो। इंसान होने का एहसास करो और इंसानियत की इज्ज़त करो वरना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
निदेशक- यूरिट एजुकेशन इंस्टीट्यूट, लखनऊ
syedtaqvi12@gmail.com

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