इमामबाड़ा जन्नत मआब सैयद तकी साहब अकबरी गेट लखनऊ में अशरए मुहर्रम की आठवीं मजलिस को मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी साहब ने “अहलेबैत निजात का रास्ता” के विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि निजात अगर मिलेगी, तो अहलेबैत के ज़रिए मिलेगी, क्योंकि सारे आमाल की जिम्मेदारी इन्हीं अहलेबैत की मुहब्बत पर है।
इसके सबूत में मौलाना ने कहा कि जब क़यामत के दिन हर इंसान अपने-अपने अमल का हिसाब देकर जन्नत की तरफ़ जा रहे होंगे, उसी वक़्त आवाज़-ए-क़ुदरत आएगी, उन्हें रोक लो उनसे सवाल होगा कि अपने इमाम को पहचानते हो?
इसी लिए खुदा ने क़ुरआन में फरमाया है कि हम हर शख़्स को उसके इमाम के साथ बुलाएंगे, तो इसका मतलब यह है कि इमाम की मारिफ़त हासिल करना बहुत ज़रूरी है। इसी लिए पैगंबर-ए-इस्लाम ने अपने बाद आने वाले इमामों के बारे में सब बता दिया था और उनमें पहले इमाम हज़रत अली अलैहिस्सलाम को ग़दीर में अपने हाथों पर बुलंद करके और उनकी विलायत का एलान करके यह बता दिया था कि उन्हें पहचानो और उनकी औलादों से मुहब्बत रखो, ताकि दुनिया में सही रास्ता मिले और आख़िरत में निजात हासिल हो सके।
अंत में मौलाना सैफ अब्बास ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के भाई हज़रत अबुलफ़ज़्लिल-अब्बास अलैहिस्सलाम का करबला के मैदान में जाना और अपने हाथों को कटवाकर शहीद होने का दिलसोज़ मंज़र पेश किया, जिसे सुनकर अज़ादारों ने गिरिया व मातम बुलंद किया।मजलिस के बाद शबीह-ए-अलम-ए-मुबारक बरामद हुआ, जिसकी ज़ियारत कराई गई और तबर्रुक तकसीम किया गया