इमाम अली( अ स) की वसीयत पर अमल की आवश्यकता: डॉ अनूप

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आज दिनांक 13 मई 2020 ,राजा झाऊलाल सद्भावना मिशन के संस्थापक डॉ अनूप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि इस्लामिक इतिहास में 19 रमज़ान का दिन अत्यधिक दुख भरा है क्योंकि आज ही के दिन 1360 साल पहले 660 ईसवी इराक के शहर कूफा की एक मस्जिद ए कूफा मे अधर्मी, ज़ालिम अब्दुल रहमान इब्ने मुलजिम ने प्रातः काल की नमाज़ अदा करते समय हज़रत अली इब्ने अबू तालिब दामादे प्रोफेट मोहम्मद, हसन- हुसैन (अ.स)के पिता इमाम अली(अ,स)को ज़हर आलूदा तलवार से ज़ख्मी कर दिया था जिसके पश्चात 21 रमज़ान को इमाम अली ने पर्दा कर लिया  मैं इमाम अली से मोहब्बत व उनके सिद्धांतों उद्देश्यों पर चलने वालों के साथ इस दुखद माहौल में भावनात्मक तौर पर उनके साथ हूं। उन्होंने कहा कि मैंने इमाम अली से प्रेम करने वालों से सुना है कि इमाम अली (अ.स)  का संदेश जो कि मैंने अपने हृदय में बैठा लिया
नंबर 1 सोच समझकर बोलो बोलने से पहले शब्द अपने गुलाम होते हैं
लेकिन बोलने के बाद आप शब्द के गुलाम बन जाते हैं ।
नंबर 2 भीख मांगने से बत्तर कोई चीज नहीं
नंबर 3 अपनी सोच को पानी की बूंद से ज़्यादा साफ रखो क्योंकि जिस तरह बूंद से दरिया बनता है,
उसी तरह सोच से ईमान बनता है।

उन्होंने इमाम अली अ,स की वसीयत भी याद दिलाई, जिसमें उन्होंने अपने बेटों से कहा कि मेरे बाद यतीमो, मोहताज, मुसाफिर व बच्चों का ख़्याल रखना उन्हें कभी भूखा ना छोड़ देना आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस -19 की महामारी से जूझ रही है कुछ लोग इस महामारी से मर चुके हैं हम सब का यह कर्तव्य बनता है कि इमाम अली की वह वसीयत कि कोई भूखा ना सोए पर अमल करते हुए किसी भी जाति, धर्म के व्यक्ति को अगर उसके पास खाने की या कोई और मूलभूत आवश्यकता जो जिंदा रहने के लिए आवश्यक हो, का पता चलने पर उस व्यक्ति को हर संभव सहायता करने का प्रयास करना चाहिए।

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